आज एक सवाल हमारे गणतंत्र और जनतंत्र के खड़ा होता कि
देश की अस्मिता के लिए किसी के दिल में कोई दर्द क्यूँ नहीं
है। क्यूँ राजनीतिक दल देश की अस्मिता के हनन पर चुप्पी
... साध लेते हैं।
एक हफ्ते से चीन ने हमारी सीमा में घुस कर देश का बलात्कार
किया हुआ है मगर देश की जनता, हमारे राजनीतिक दल, हमारे
बिज़नस घराने जो चीन के साथ व्यापार करते है और मीडिया
चैनल्स सब क्यूँ खामोश हैं? अरे बलात्कार जैसी सामाजिक
समस्या तो निबटाई जा सकती है मगर यदि देश की अस्मिता
ही लुट गयी और देश गुलाम हो गया तो सामाजिक समस्याएँ
तो और भयानक रूप से बढ़ जाएँगी।
हमारा जनतंत्र क्रिकेट मैच में जीत पर पागल हो जाता है,
तालियाँ बजाता है, बम्ब पटाखे जलाता है, खासतौर पर
पाकिस्तान से जीतने पर, मगर वही पाकिस्तान हमारी
सरहदों पर छेड़खानी करे या चीन हमारी सीमाओं का
अतिक्रमण करे तो जनतंत्र के खून में उबाल क्यूँ नहीं
आता। यही हाल हमारे गणतंत्र का है जो ऐसे विषयों
पर आवाज उठाने की हिम्मत नहीं करता।
मोदी पर रोज बकबक करने वाले मीडिया चैनल एक बार
कोशिश नहीं कर रहे कि जनमत की आवाज बुलंद करके
चीन के बहरे कानो तक पहुंचाए।
ऐसा केवल इसलिए होता है क्यूंकि गणतंत्र और जनतंत्र
तो है ही नहीं देश में, बस तंत्र ही तंत्र रह गया है और तंत्र
को कांग्रेस अपनी दाल रोटी की समस्याओं में उलझाये
रखती है। राष्ट्र की समस्याओं की तरफ देखने का तो
जनता के पास समय ही नहीं है।
इसका मुख्य कारण है की कांग्रेस ने देश में राष्ट्रवाद
को पनपने ही नहीं दिया और जिस देश में राष्ट्रवाद नहीं
होता, वो तो एक पशुओं की जमात बनके रह जाता है।
कांग्रेस इसी राष्ट्रवाद के ना पनपने की वजह से देश
को लूटती रही है।
एक जिम्मेदारी अभी भी बिज़नस कम्युनिटी को पूरी
करनी चाहिए कि चीन से आयत होने वाले माल
के आर्डर तुरंत रद्द करें। बिज़नस और मुनाफा तो
होता रहेगा, पहले तो देश की अस्मिता की रक्षा करनी
जरूरी है। चीन के उच्चयोग के बाहर बे-मियादी धरना
शुरू कर दिया जाये और तब तक जारी रहे, जब तक
चीन वापस न चला जाये।
सुभाष जी से साभार
देश की अस्मिता के लिए किसी के दिल में कोई दर्द क्यूँ नहीं
है। क्यूँ राजनीतिक दल देश की अस्मिता के हनन पर चुप्पी
... साध लेते हैं।
एक हफ्ते से चीन ने हमारी सीमा में घुस कर देश का बलात्कार
किया हुआ है मगर देश की जनता, हमारे राजनीतिक दल, हमारे
बिज़नस घराने जो चीन के साथ व्यापार करते है और मीडिया
चैनल्स सब क्यूँ खामोश हैं? अरे बलात्कार जैसी सामाजिक
समस्या तो निबटाई जा सकती है मगर यदि देश की अस्मिता
ही लुट गयी और देश गुलाम हो गया तो सामाजिक समस्याएँ
तो और भयानक रूप से बढ़ जाएँगी।
हमारा जनतंत्र क्रिकेट मैच में जीत पर पागल हो जाता है,
तालियाँ बजाता है, बम्ब पटाखे जलाता है, खासतौर पर
पाकिस्तान से जीतने पर, मगर वही पाकिस्तान हमारी
सरहदों पर छेड़खानी करे या चीन हमारी सीमाओं का
अतिक्रमण करे तो जनतंत्र के खून में उबाल क्यूँ नहीं
आता। यही हाल हमारे गणतंत्र का है जो ऐसे विषयों
पर आवाज उठाने की हिम्मत नहीं करता।
मोदी पर रोज बकबक करने वाले मीडिया चैनल एक बार
कोशिश नहीं कर रहे कि जनमत की आवाज बुलंद करके
चीन के बहरे कानो तक पहुंचाए।
ऐसा केवल इसलिए होता है क्यूंकि गणतंत्र और जनतंत्र
तो है ही नहीं देश में, बस तंत्र ही तंत्र रह गया है और तंत्र
को कांग्रेस अपनी दाल रोटी की समस्याओं में उलझाये
रखती है। राष्ट्र की समस्याओं की तरफ देखने का तो
जनता के पास समय ही नहीं है।
इसका मुख्य कारण है की कांग्रेस ने देश में राष्ट्रवाद
को पनपने ही नहीं दिया और जिस देश में राष्ट्रवाद नहीं
होता, वो तो एक पशुओं की जमात बनके रह जाता है।
कांग्रेस इसी राष्ट्रवाद के ना पनपने की वजह से देश
को लूटती रही है।
एक जिम्मेदारी अभी भी बिज़नस कम्युनिटी को पूरी
करनी चाहिए कि चीन से आयत होने वाले माल
के आर्डर तुरंत रद्द करें। बिज़नस और मुनाफा तो
होता रहेगा, पहले तो देश की अस्मिता की रक्षा करनी
जरूरी है। चीन के उच्चयोग के बाहर बे-मियादी धरना
शुरू कर दिया जाये और तब तक जारी रहे, जब तक
चीन वापस न चला जाये।
सुभाष जी से साभार
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